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मेरी नई कविता “कुछ पाना है तो” विषय ” हासिल”

यदि जीवन में कुछ पाना है,
तो कठिन परिश्रम करना होगा।
यदि बनाना हो इंद्र बज्र तो,
तप दधीचि सा करना होगा।।

स्वाति की हर बून्द न होगी,
न हर सीप में मोती पाओगे।
कटु सत्य यही जीवन का ,
बाधाएँ पग -पग पर आएंगी।।

पर बाधाओं के आगे तुमको,
अटल हिमालय सा होना होगा।
यदि………

जिस तरु ने पतझड़ देखा,
उसने ही बसन्त का सुख पाया ।
जिसमें जिजीविषा की कमी रही,
वह विटप सावन में मुरझाया होगा।।

यदि बनना हो फूलों का राजा,
तब कांटों में खिलना होगा ।।
यदि………

करना चाहो यदि अधिकार गगन पर,
तब तुमको ‘सूरज’ सा जलन होगा।
यदि ब्रह्मोस परीक्षण करना हो तो,
तुमको कर्म कलाम सा करना होगा।।

यदि जीवन में होना है, महान तुम्हे तो।
“रूद्र” सा पान हलाहल करना होगा।।
यदि…….

सूरज तिवारी ‘रूद्र’

इंद्रधनुष

सात रंग हैं इंद्रधनुष में,
लोग यही बतलाते हैं।
बैनी आह पिनाला कहते,
सब हमको यही पढ़ाते हैं।।

सप्तरंग ये इंद्रधनुष के,
कुछ तो हमसे बताते हैं।
आओ सीखें हम इनसे,
जो ये हमें सिखाते हैं।।

बैगनी कहता है हमसे,
विज्ञान बढ़ाओ।
नीला कहता है हमसे,
निरक्षरता दूर भगाओ।

इतना अपना ज्ञान बढ़ाओ,
सारे गगन पे तुम छा जाओ।
नही चलेगी औरो की मनमानी,
देखो कहता है ये रंग आसमानी।।

कहे हरा रंग हरियाली लाओ,
वृक्ष लगाकर धरा सजाओ।
पीला रंग कहे है प्यारे,
प्रेम और सद्भाव बढ़ाओ।।

कहे नारंगी भगवा की पहचान,
विवेकानंद सा बनो महान।
सारे जग को तुम राह दिखाओ,
फिर भारत को विश्वगुरु बनाओ।।

है लाल रंग बलिदानों का,
आज़ाद भगत से दीवानों का।
मातृभूमि पर मिट जानो को,
देता सीख जवानों को।।

इंद्रधनुष के इन सीखो को,
अपने जीवन में अपनाओ।
प्रबल करो पुरुषार्थ को अपने,
जग में भारत माँ का सम्मान बढ़ाओ।।

©
सूरज तिवारी ‘रूद्र’
कनावां फैज़ाबाद (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल नंबर 9198389039

*मेरी माँ मेरी गुरु*

💐*मेरी माँ मेरी गुरु*💐

जीवन की इस नदिया का

तुम तो एक किनारा हो।
मेरी इस जीवन नैय्या का
तुम ही एक सहारा हो।।

जब जब घिरा मुसीबत में
केवल याद तुम्हारी आयी ।
मुझको हर कदम कदम पर
केवल तुम्ही पड़ी दिखलाई।।

जो कुछ मिला है मुझको,
सब तो तुमसे ही पाया है।
मेरा कोई अस्तित्व नही है,
अस्तित्व तुम्ही से पाया है।।

जग में आने का सौभग्य दिया,
मातृ भूमि पर मिट जाने का ज्ञान दिया।
हे जन्मदात्री,ईश भी तुझको नमन करे है,
पथ प्रदर्शक बनके तुमने ही कल्याण किया।।

गुरु दक्षिणा देकर मैं,
गुरु के ऋण तो चुका दूंगा।
ज्ञान का आलोक फैलाकर,
मैं भारत का नाम बढा दूंगा।।
पर हे जननी तेरा ऋण मैं कैसे चुकाऊंगा,
जब भी मुझको जन्म मिले मैं गोद तेरी ही चाहूँगा।।

©®स्वराचित
सूरज तिवारी ‘रूद्र’
कनावां फैज़ाबाद उ.प्र.
मोबाइल नंबर-9198389039

5/9/2017

मकर संक्रांति

मकर राशि मे सूर्य हैं,गइ दक्षिणायन रात।

उत्तरायण लाये सदा, जीवन में नव प्रात।।


जीवन के सब दुख कटे, सब सुख मिले अपार।

नव खुशियाँ लाये सदा, मंगलमय त्योहार।।





‘मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं’

©®

भौं भौं कवि सम्मेलन

श्वानों सी है दुम जिनकी,

श्वान बने वो फिरते हैं ।

झूठी शान दिखाने खातिर,

कुत्ते बन भौं भौं करते हैं।।
कुत्ते फिर भी अच्छे हैं,

स्वामी पर मिट जाते है।

कितनी मोटी बोटी दे दो,

फिर भी वफ़ा दिखलाते हैं।।
ये अपमान हुआ श्वानों का,

यदि इनको मैं श्वान लिखूं।

जिसने कलम झुका दी पैसों के आगे,

उसका कवियों में कैसे नाम लिखूं।।
#भौं भौं कवि सम्मेलन#
©®

सूरज तिवारी रुद्र

कनावां फैज़ाबाद उत्तर प्रदेश

सम्पर्क सूत्र 91983899039

surajtiwari2244@gmail.com

उनकी डायरी से कुछ शब्द:

किये थे काम हमने भी जो कुछ भी हमसे बन पाये।

ये बातें तब की हैं आज़ाद थे और था शबाब अपना॥

मगर अब तो जो कुछ भी हैं उम्मीदें बस वो तुमसे हैं।

जबाँ तुम हो लबे-बाम आ चुका है आफताब अपना॥

अशफाकुल्ला खान (मृत्यु से एक रात्रि पहले राम प्रसाद बिस्मिल के साथ)

जाऊंगा खाली हाथ मगर ये दर्द साथ हीं जाएगा।

जाने किस दिन हिंदुस्तान, आजाद वतन कहलाएगा॥

बिस्मिल हिन्दू हैं कहते हैं फिर आऊंगा फिर आऊंगा।

फिर आकर ऐ भारत माँ तुझको आजाद कराऊंगा॥

जी करता है, मैं भी कह दूँ ,पर मज़हब से बंध जाता हूँ ।

मैं मुसलमान हूँ पुनर्जन्म की बात नहीं कर पाता हूँ ॥

हाँ ख़ुदा अगर मिल गया कहीं, अपनी झोली फैला दूँगा।

और जन्नत के बदले उससे एक पुनर्जन्म ही माँगूँगा॥